Sunday, 16 February 2020

Detachment is the key to life and beyond... On Shivratri 21-Feb-2020














शांति साधारण नही शिव से जुड़ा हर तार है,
शांति के ही गर्भ में तो गूँजता ओंकार हैं |
विचारों के समर में कलरव, कोलाहल रहा,
मन के गहरे सागर में रण रहा, हलाहल रहा |
साँस की दुविधा यही थी, प्राण का जंजाल था,
अब समझ पाया मेरा मन, वो स्वयं कलिकाल था |
शोर से सन्नाटे तक की जटिल जीवन डगर,
प्यार से हम पार करते साथ रहते तुम अगर |
थोड़ी सुलझी, थोड़ी उलझी, मन की ढेरों मिन्नतें,
भस्म होतीं और कहतीं अब जियो जीवन निडर |
अब नहीं माया के मेले, ना ही हैं सपने नवेले,
नम आँखों से भीड़ पूछे रह गये कैसे अकेले |
अब नही मन का समंदर ना ही मेरा तन है सुंदर,
ना रहा अब रूप मेरा, ना कोई आकार है,
मौन मन मन से है कहता ये ही तो संसार है |
शांति साधारण नही शिव से जुड़ा हर तार है,
शांति के ही गर्भ में तो गूँजता ओंकार हैं |

- Amit Roop

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