Wednesday, 29 August 2018

वसुदेव का दुलारा - This Janmashtami, let's recognise dad's love also


टूटे हैं सारे बंधन, यमुना में हुई हलचल|
घनघोर हैं घटायें, यूँ नृत्य करते बादल|
रात स्याह काली आई, सोए हैं आततायी|
धरती में हैं वो आया सुंदर सलोना चंचल|

बिजली है जो ये चमकी वो है आरती की ज्योति|
पूजन करें दिशाएं, है पाप को चुनौती|
उन्मुक्त हो रहीं हैं जल-वृष्टि, नभ, हवाएँ|
मानो परख रही हो उन्हे कर्म की कसौटी|



वैकुंठ का वो राजा, नर रूप में है आया|
कल्पान्त का वो कारक, वो काल का है साया|
वो सृष्टि का रचयिता, वो सृष्टि का विनाशक|
वो परमपिता परमेश्वर, वसुदेव का दुलारा|

- Amit Roop


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