Friday, 18 November 2022

रोम पुलकित, चित्त विस्मित, राम ही सन्यास हैं




चर अचर की चेतना और सृष्टि का सारांश हैं, 

वो राम सबके मन में बसते चिर निरंतर ही स्वांस हैं|


राम से ही है जो जन्मा, राम में ही है समाया,

राम को करूँ क्या मैं अर्पण,  राम से ही है जो पाया| 

राम सृस्टि का भोग वैभव राम ही उपवास हैं,

रोम पुलकित, चित्त विस्मित, राम ही सन्यास हैं|


राम सत्ता राम  राजे, राम कण कण में विराजे 

राम नैनो की लालसा में, राम धड़कन की धुन में बाजे|

हों जो गहरे, मन में अँधेरे, दिव्य दीपक सी आस हैं,

मन की आँखों से जो देखे राम अपने ही पास हैं|

Friday, 21 October 2022

Unfulfilled desires and connection with dearth of blessings

Knowledge about something is directly related to lack of it. One who doesn't have peace of mind knows a lot about meditation and mindfulness techniques. One who has never thought of exploring it. One who lacks height knows what contributes to good height. One who is fat knows a lot about balanced diet. These things though never produce desired results and even if they do, it takes a lot of patience. Almost, forever.

On the same ground, people who know a lot of ways to please God, bhakti, devotion etc basically lack the blessings and who have blessings enjoy the life and never need to think about from where it all is coming. What is the source!

Sunday, 8 May 2022

Dwait Vs Adwait

एकैवाहं जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा।

"I alone exist in this universe. Who else is there beside me?”

When a baby is inside mother's womb, whether they are one or two?

Umbilical chord is the lotus that is attached to navel of lord Vishnu and the creator brahma and creation brahmand are on it - Visualise Lord Padmanabhan. I bow to Him.

Mata Yashoda saw entire cosmos in mouth of Lord Krishna and Shree Kak Bhushundi saw tha same inside mouth of lord Rama.

God is not there somewhere sitting in sky. We are all, including everything all around us, are inside God.

Now, its up to reader whether he things there are two - Brahma and Brahmanda or Just one only Brahma.

This is just an analogy. Real understanding of God is beyond human intelligence.


- Amit Roop


Sunday, 10 April 2022

On Ram Navami 10 Apr 2022

 
 

चर-अचर की चेतना और सृष्टि का सारांश हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

नारायण से मांग ले जो मां की ममता, ऐसी कौशल्या,
वचन पालन में वार दे जो प्राण अपने, वो राजा दशरथ,
ऐसे श्रेष्ठ माता-पिता का मान हैं, सम्मान हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

चर-अचर की चेतना और सृष्टि का सारांश हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

देवी अहिल्या का मौन राम जप, माँ शैलजा का सिया को दिया वर,
भरत की सोच निर्मल और लखन का सर्व समर्पण,
माँ सबरी के सब्र का सार्थक परिणाम हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

चर-अचर की चेतना और सृष्टि का सारांश हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

हनुमान का बल असीमित और अंगद का पाँव स्थिर,
काल के सम्मुख निडर जटायु की ललकार नैतिक,
दुस्ट दानवों के अहम् का करते सदा संहार हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|

चर-अचर की चेतना और सृष्टि का सारांश हैं,
वो राम सबके मन में बसते चिर-निरन्तर ही श्वांस हैं|




- Amit Roop